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उपहार अब रहस्य नहीं

बेटी के जन्मदिन के उपहार, आपके कहाँ हैं ? क्या आपको लगता है की यह समय जो आपको, इस पृथ्वी  पर मिला है, वह एक  उपहार है ? क्या आपको  लगता है की जो साँस आप लेते हो, वह भी एक उपहार है ? क्या आपको लगता है की यह लयबद्ध दिल की धड़कने भी एक उपहार हैं ? क्या आपको लगता है कि यह शरीर जो आपको मिला है, एक उपहार है ? क्या आपको यह भी लगता है कि यह पेड़, वायु, पर्वत, सूर्य , चन्द्रमा,... यह सब भी उपहार हैं? क्या ऐसा  लगता है की यह सारी सृष्टि आपके लिए रचा कर, आपको उपहार रूप मैं समर्पित है? जब आपको उपहार मिलता है तो आप क्या करते हो? मुंह लटका के तो नहीं बैठते हो, हैना? आप उछलते हो, कूदते हो, चिल्लाते हो, हँसते हो, रोते हो, कई रूप मैं अपनी कृत्यज्ञता व्यक्त करते हो, करते हो की नहीं? अहा!, ओह्हो!, मैं आपका धन्यभागी हूँ, मैं अपना आभार कैसे व्यक्त करूँ , आप कितने दयालु हो, आपने मेरे बारे मैं सोचा, कब से मैं इसका इंतज़ार कर रही थी,  मैं सरे जीवन भर आपको याद करूंगी, आप कितने दिलदार हो, मुझसे यह ख़ुशी समाय नहीं संभलती , मुझे पता नहीं मैं क्या कहूँ ... वगैरह वगैरह  ...

the rush of the routine - जल्दी करो

जल्दी उठो जल्दी हगो जल्दी मुंह साफ़ करो जल्दी स्नान जल्दी कपडे पहना करो जल्दी नास्ता जल्दी बस्ता भागो नहीं तो गाड़ी निकल जाएगी जल्दी बदलो कपडे जल्दी खाओ कुछ जल्दी जाओ खेलने जल्दी ट्यूशन जल्दी होम वर्क जल्दी रात का खाना जल्दी सो जाओ कल फिर जल्दी उठना है जल्दी मरो फिर जल्दी जिन्दा होना है इस भाग दौड़ मैं फिर चूहा बनना है

Art of living satsang update

Make your anger very expensive, very precious. Nobody should be allow to buy it at any cost. Make your smile cheap. Just let it flow without being asked for. It is the only expression which is closest to your core nature. अपना गुस्सा बहुत मेहेंगा कर दो. दुनिया मैं कोई उसे नहीं खरीद पाए. वहीँ अपनी मुस्कान इतनी सस्ती कर दो की वोह यूँही प्रकट होती रहे.  ज़िन्दगी मैं तृप्त रहो. यही सबसे बड़ा गुण है.  हम भिखारी की तरेह सबसे कुछ न कुछ मांगते रहते हैं. जब कोई भिखारी हमारे सामने आता है तो हम क्या करते हैं. हम चुप चाप रास्ता बदल रहते हैं या फिर गाड़ी की खिड़की ऊपर कर लेते हैं, उसकी तरफ देखतें भी नहीं हैं. प्रकृति का भी व्योहार कुछ इस तरेह से ही होता है.  कहते हैं जो ध्यानस्त होते हैं, वेद और ज्ञान उनकी तरफ ही अग्रसर होते हैं. जैसे पंडित मंदिर मैं दिन भर वेदों का उच्चारण करते हैं लेकिन फिर भी दुखी  दिखतें हैं, उनके चेहरे पर न तेज होता है न कोई चमक.   ज्ञान मांगने से या फिर दोहराने से नहीं मिलता है.  Knowledge comes to those who are in meditation. The c...

विचारों का श्रोत

यह विचार आते कहाँ से हैं. शरीर से, वातावरण से, डर से, प्रेम से, इन्द्रियों से, व्यक्तियों  से, व्यक्तित्व   से, आत्मा से या  फिर परमात्मा  से. लेकिन जहाँ से भी आते हैं, यह बीज  की तरह  मन की धरातल पल पनपने के लिए क्यूं तत्पर होते हैं. कुछ  विचार ऐसे हावी हो जातें हैं जैसे उनका कोई अंत नहीं. कुछ कब आते हैं ओर कब चले जाते हैं, उनकी कोई खबर नहीं. कुछ विचार ऐसे कोड़े बरसते हैं की मन के साथ साथ शरीर भी छलनी छलनी हो जाता है. कुछ विचार बर्फ के गोले होतें हैं ओर शरीर को सुन्न कर देते हैं. कुछ विचार कल कल करते झरने की तरेह फुदकते रहतें हैं. कुछ ऐसे मिलतें हैं जैसे सदियों बाद पाठशाला के  मित्र मिलें हों. कुछ ऐसी चट्टान होतें हैं की छाती भारी कर जातें हैं. छाती  फिर  ऐसे विचारों की उत्पत्ति करती है की मन भारी हो जाता है. फिर एक  दूजे के बोझ  तले दब कर खुद की पहचान को नष्ट कर देते हैं. आत्मीयता को ध्वंश कर देते हैं. ...

मन मैं विचारों का मंथन

एक समुद्र मंथन था और एक विचारों का मंथन है. उसका घटनास्थल विशाल समुद्र था, इसका घटनास्थल विशाल मन है. उसमें देवता, दानव और परमात्मा थे , इसमें अच्छे, बुरे विचारों के ऊपर विवेक और बुद्धि हैं. उधर चाह अमृत की थी, इधर मुक्ति की है. उधर देवता दानवों के बडती शक्ति से परेशान थे, इधर अच्छाई बुराई की कहर से परेशान है. जब विष निकला तो शिव आये, इधर भी कभी सत्य से संपर्क होगा. उधर भी देवता सुख, शांति और ख़ुशी चाहते थे, इधर भी वही इच्छायें हैं. उधर भी देवताओं को अपना आसन और स्वर्गलोक छोड़ कर घनघोर समुन्द्र मैं खड़े होके परिश्रम करना पड़ा, इधर भी हमें चिंतन , मनन, करना पड़ेगा, नहीं तो विवेक बेचारा कोने मैं सड़ता रहेगा, बुद्धि भ्रस्ट    तो हो ही गयी है , ओर विकारों से युक्त हो जाएगी, तुम भोगते रहोगे और योग की बातें सुनते रहोगे ओर मेरी तरेह सुनाते रहोगे . अपने जीवन मैं सबको मंथन करना पड़ता है, हर इंसान को, हर बार, हर जन्म मैं. यह तप आज से ही चालू हो जाए तो अच्छा  है, वर्ना ज़िन्दगी विष तक ही पहुँच कर चूक जाएगी. kya kehte हो!