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Prayer and effort - प्राथना और प्रयत्न

सिर्फ  प्रयत्न करोगे तो थक जाओगे उदास हो जाओगे फिर गाओगे परेशान परेशान मैं परेशान परेशान परेशान अपनी रुआन्शि सूरत लेकर समाज मैं दुःख का कारण बनोगे सिर्फ प्राथना करोगे तो नास्तिक हो जाओगे ईस्वर से शिकायत करोगे अब तुम मेरी कुछ नहीं सुनते हो कैसे खुदा हो खुद के बन्दे को ही नकारते हो समाज पर बोझ बन जाओगे एक गलत उधारण कहलाओगे यह तो खुदा गवाह था ईस्वर ने इसकी भी न सुनी थोडा प्रयत्न थोड़ी प्राथना दोनों जरूरी हैं शंकराचार्य भी चलते रहे केरल से बनारस तक पूरी से द्वार्का तक बत्तीस उम्र की ज़िन्दगी मैं एक संकल्प लेकर केरल मैं बैठकर उन्हॉने अद्वैत का प्रचार क्यों नहीं किया बुद्ध भी चालीस साल तक गाँव गाँव मैं चले वो समाधी मैं मस्त रह सकते थे लेकिन नहीं महावीर भी चलते रहे जब असीम प्रयत्न से थक जाते हो तब आराम से भगवत शरण मैं जाते हो नहीं तो इस दुनिया मैं भटक जाते हो जीवन को खान पान और पैसा समझ कर धोखे मैं रह जाते हो कभी वक्त मिले तो जीवन की गहरई मैं झाकोँ मैं कौन हूँ यहाँ क्यूं आया हूँ इस भूक को भी जागने दो जब प्यास लगती है तभी मटक...