Monday, December 31, 2012

एक बंधन

एक था वक़्त
जब मैं लिखा करती थी

आसमां मैं उड़ते
अरमान पकड़ा करती थी

अनजाने मैं मुझे
एक बंधन मैं पिरोया गया
मुझे उम्मीदों की लहरों मैं
छोड़ा गया जब

उसने ऐसे जकड़ा मुझे
पकड़ा, तोडा, मरोड़ा मुझे
आसमां से पिंजरे मैं
छोड़ा मुझे

पंख कटे, अरमान मिटे
दुनिया मेरी सिकुड गई
अंगडाई भी  लेने से भी
मैं कांप गयी
बोलने से पहले
मैं संकुंच गयी

अब सिर्फ डरती हूँ मैं
सब करती हूँ
पर यहाँ रहतीं
नहीं हूँ मैं

माँ के आँचल को
खोजती हूँ मैं
गुमशुदा ही सही
पर घूमती  हूँ मैं

तलाश मैं हूँ मैं
एक किनारे की आस मैं हूँ मैं
उन हवा के झोकों की
फ़िराक मैं हूँ मैं
थपकियाँ जिनकी
झपकियाँ देती मुझे

थक गयी हूँ मैं
थम गयी हूँ मैं 
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