Wednesday, February 27, 2013

is god - no god

पहले खुदा  नहीं था
मैं अकेला था

अब खुदा है
मैं खुश होता
खुदा  तो ख़ुशी है ही
पर तुम खुश नहीं

तुम्हे खुश करने के लिए
नाखुदाई कर नहीं सकता
खुदा  कब, क्यूं, कहाँ, किसे आए 
यह सुना नहीं सकता

तुम्हारे डर  को दूर कैसे करूं
इस बेखुदी का रुख सीध कैसे करूं

य़ा खुदा
अब तू ही बता
तेरे इस बन्दे से
मुंह फेर कैसे करूं

तू नहीं था
तो दर्द था
तू है
तो भी दर्द है
इस दर्द-ए -दिल की दास्तान
कैसे ख़तम करूं 

तेरी करीबी
तेरे तरीके
मुझे सुहाए
पर सबको न भाये
तुझे इस दुनिया मैं कैसे रखूँ



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