Thursday, June 06, 2013

Why should we do idol worship?

Idol is representative of what is attractive to us. We have made Radha-Krishna to be so beautiful, cast in marble, with silken dress, jewellery, with lots of flowers and fruits and food in and around them. 

It is simply to arrest the busy mind. To stop it. So that it can close it eyes after witnessing the glamour and see inside. The real beauty within. The godliness within. The beautiful self. 

मूर्ति प्रतीक होती है एक विस्वास की। इसलिए उसे प्रतिमा भी बोलतीं हैं। सब धर्मों मैं कुछ न कुछ प्रतीक है। यह सिर्फ हिन्दू धर्म मैं ही नहीं है। 

पहले मंदिर भी ऐसे बनाते थे की उनमें सरे आकर्षण बहार होते थे। पहले परिक्रमा लेने से बहार के आकर्षण से थक कर जब तक मंदिर के गर्भ मैं आते थे तब उधर कम अँधेरे मैं कर्पूर के प्रकाश मैं परमात्मा की मूर्ति के दर्शन होते थे। यह प्रतीक है की तुम भी अपने अन्दर के ईस्वर को प्रकाशित करो। उसके पश्चात बहार आकर बैठने की प्रथा थी। बैठ कर ध्यान करते थे आँख बंद करके। तब जेक अन्दर के जो दैवी गुण हैं वो उजागर होते थे। 

अब तो फटाफट का काम है। एक अदा  के साथ भगवान् के दर्शन करके कुछ क्षणों मैं मंदिर के बहार हो जाते हैं। ऐसी जल्दबाजी मैं इस्वर नहीं मिलेंगे। 

मूर्ति मात्र एक सहारा है मन को आकर्षित करने का, अपनी और रिझाने का। उसे देख कर मीरा बाई दीवानी हुई थी, उसे देख कर चैतन्य महाप्रभु मस्त हुए थे लेकिन जब वोह गाते थे या नाचते थे तो अक्सर उनकी आंखें बंद हो उनके अन्दर के देवता को प्रकाशमयी करते थे। 

Christians have the cross. They have put the cross at cross-roads and on top of mountains. Same with Muslims who have mosques at different places. Some religions like sikh have books as symbolic of divine. Its not divinity in the books or statues. Its the love and honor that you create towards outside that helps you to go inwards and realize the divine within. Its not just Hindus who have statues everywhere. 

The statues are there to remind that you need to look inwards and be still. In stillness God happens. In stillness God reside. Stillness is due to God and God is still, love, peace.

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