Saturday, December 19, 2009

तुम इतने परेशान क्यूं हो?

माया की सौ बातें, परमात्मा  की एक बात. माया कहती है, कहाँ? कैसे? क्यूं? किसने? कब? ऐसा क्यूं किया? मेरे साथ ठीक नहीं हुआ!, उसने ऐसा क्यूं कहा? परमात्मा कहतें हैं की सिर्फ मेरा नाम लो, मैंने तुम्हे इसलिए ज्ञान दिया और अछा अच्हा कहा की तुम दुनिया के काम आयो, इसलिए नहीं की मुझे तुमसे कोई उम्मीद है, लोग अक्सर अछा अछा बोलतें है जब उन्हें आपसे कोई काम निकलना होता है , लेकिन परमात्मा की मनसा ऐसी नहीं है.
जब ज्ञान लिया है, ध्यान  किया है तो परीक्षा तो देने ही पड़ेगी. यह परीक्षा साल के अंत मैं नहीं आएगी, बल्कि हर दिन और हर पल ऐसी परिस्थितियाँ  आएँगी  जो तुम्हारे ज्ञान का  खरा परिक्षण लेंगी. अगर तुम्हे लगता है की अछा सोचने से और इश्वर का ध्यान करने से ज़िन्दगी आसान हो जाएगी , तो ऐसा नहीं होगा. बस तुम्हारा नजरिया बदलेगा और तुम पर क्या असर होता है , वह बदलेगा.
बाकि तो तुम्हारा बीता हुआ कल और पराये लोग और उनके विचार तो हमेशा रहेंगे. अपने भूत काल को आज मत बनायो, नहीं तो वह तुम्हारा कल बन जाएगा. भूत को भूत मैं रहने दो, भविष्य को भविष्य मैं, खुद को खुदा मैं.
ज्ञान की बातें लो और उन्हें दोराहो, तब तक जब तक वह तुम्हारी आदत न बन जाए. मुरली कहती है की "इस नाटक मैं जो हो रहा है वह ही सत्य है ", तो आज दिन मैं जो कुछ भी हुआ हो उसे सत्य समझ कर, उस  कर्म का अंत वहीँ कर दो, उसकी अर्थी बना कर अपने साथ नहीं खीचो. उससे सवाल मत करो और न ही उसे समझो, उससे सीख लो और परमात्मा  की एक बात मैं खो जाओ.

Source: Awakening with Brahmakumaris, 7:10 PM Aastha channel, with दादी जानकी और शिवानी.
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