Saturday, December 12, 2009

Think no evil

Reactions: 

See no evil, Say no evil, Hear no evil. Have you considered "Think no evil".
Thoughts build destiny. Do you want to build or drive full blood with empty hopes?
Your morning should have a dose of spiritual intellect. Post meditation, it will be your guiding light, north star, for the rest of the day.
Thoughts have iron clad gloves to wrench you and squeeze the life out of you if you don't "Let Go", "Forgive".
People tell one word and go away to do thousand different things in their lives. You hold on to that word and make thousand versions/evils out of it. This is unhealthy and utter waste of your life-force. We go to ten people to validate our angry thoughts and justification. Is it required? Why don't you let healthy thoughts occupy you instead?
The only way is through love. There is no other way. Every other way might look to accomplish something temporarily. Create a purpose in life to "full it"

  • from peace to peace-full
  • from happy to happy-full
  • from energy to energy-full
  • from love to love-full
Imagine your FULL being. How beautiful and nourishing, both for yourself and for others in your vicinity? Fullfill your existence.


संकल्प कर्म इन्द्रियों से आते हैं या फिर आत्मा से आते हैं. हमें दोनों के प्रति सतर्क रहना है. दोनों की सुनो. आत्मा तीन रूप मैं प्रस्तुत होती है,

  1. मन - संकल्पों की शूरुआत येहीं होती है. कर्म इन्द्रियाँ या फिर हमारा निश्चय विचार लाता है.
  2. बुद्धि - विचारों को रखती है या फिर मन से कहती है की यह तुम्हारे लिए ठीक नहीं. कई बार हमें पता नहीं होता है की सही क्या है और गलत क्या है? हमारा विवेक साफ़ नहीं होता है. यह वक़्त है की अच्छे  संकल्प विचार धारा  मैं लायें.
  3. संस्कार - विचार जब बुद्धि से निकल कर कर्म बन जातें हैं तो फिर वह अनुभव हमारी आत्मा मैं एकत्रित हो जातें है. हमें कभी कभी भारी लगता है क्यूंकि हम अपनी आत्मा को नकारात्मक संस्कारों से भर रहें  हैं. 
हम निर्णय ले सकते हैं की हमारे मन मैं कैसे संकल्प आयें. कुछ आठ - दस संकल्प हम निश्चय कर लें जैसे की 
  1. मैं एक आत्मा हूँ. 
  2. मैं अजर, अविनाशी हूँ. मैं न जन्मी हूँ और न ही मेरी मृत्यू हो सकती है.
  3. मैं आनंद स्वरुप हूँ
  4. मैं शांत स्वरुप हूँ.
  5. मैं शुद्ध हूँ, निरंजन हूँ.
  6. मैं एक बिंदु स्वरुप चैतन्य  शक्ति  हूँ.
इन संकल्पों को दिन मैं बार बार लायें. यह संकल्प फिर हमें अपने आप परमात्मा का अनुभव कराएँगे.

Content Source. BK Sister Mohini ji . www.brahmakumaris.com 
Post a Comment

Disqus for dsteps blog