Saturday, January 12, 2013

उनके लिए तत्पर - longing for the divine

भगवान् आंगन मैं
बंद हैं पट

खोलो झरोखा
देखो मन

आने दो हवा को
सींचे मन

पलट के नज़रें
देखो मन

इधर उधर नहीं
भीतर  अन्दर

झुकी नज़र
उठती पल

सामने बैठें हैं
अभी
इधर
भगवान् अन्दर

फिर क्यों
खोजे हैं
भटके मन

गुजर न जायें
बीतें पल

सारे के सारे
बिखरें क्षण

एक मिलन
की आस मैं

बैठें हैं लेके
भीगी पलकें
बेचैन मन
हर पल

तत्पर तत्पर तत्पर

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